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mahabharat 8.53.4: हे राजन! उस बाणों की वर्षा को बड़े वेग से सहसा सहते हुए और श्रेष्ठ महारथियों को मारते हुए महाबली अर्जुन युद्धभूमि में विचरण करने लगे॥4॥   |   mahabharat अध्याय 8.53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  8.53.4 
ता वृष्टी: सहसा राजंस्तरसा धारयन् प्रभु:।
व्यगाहत रणे पार्थो विनिघ्नन् रथिनां वरान्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! उस बाणों की वर्षा को बड़े वेग से सहसा सहते हुए और श्रेष्ठ महारथियों को मारते हुए महाबली अर्जुन युद्धभूमि में विचरण करने लगे॥4॥
 
O King! Suddenly, bearing that shower of arrows with great force and killing the best of charioteers, the powerful Arjuna started roaming in the battlefield. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)