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mahabharat 8.53.28: हे नरदेव! उस समय उसके पैर बँधे होने के कारण वह हिल भी नहीं सकता था। तब अर्जुन ने मुड़ी हुई गांठों वाले बाणों से उसे मारना आरम्भ कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  8.53.28 
ते बद्धा: पादबन्धेन न शेकुश्चेष्टितुं नृप।
ततस्तानवधीत् पार्थ: शरै: संनतपर्वभि:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे नरदेव! उस समय उसके पैर बँधे होने के कारण वह हिल भी नहीं सकता था। तब अर्जुन ने मुड़ी हुई गांठों वाले बाणों से उसे मारना आरम्भ कर दिया।
 
O lord of men! At that time, because his legs were tied, he could not even move. Then Arjuna started killing him with arrows having bent knots. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)