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mahabharat 8.53.27: रणभूमि में जब उस पर बाणों का आक्रमण हुआ, तब उसने अर्जुन का उत्तम रथ छोड़कर उस पर अपने समस्त अस्त्र-शस्त्र छोड़ने का प्रयत्न किया॥27॥   |   mahabharat अध्याय 8.53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  8.53.27 
ते वध्यमाना: समरे मुमुचुस्तं रथोत्तमम्।
आयुधानि च सर्वाणि विस्रष्टुमुपचक्रमु:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
रणभूमि में जब उस पर बाणों का आक्रमण हुआ, तब उसने अर्जुन का उत्तम रथ छोड़कर उस पर अपने समस्त अस्त्र-शस्त्र छोड़ने का प्रयत्न किया॥27॥
 
When he was attacked by arrows in the battle-field, he left Arjuna's excellent chariot and tried to release all his weapons on him.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)