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mahabharat 8.53.21: हे यदुवंशी श्रेष्ठ! इस पृथ्वी पर मेरे अतिरिक्त कोई दूसरा ऐसा नहीं है जो इस भयंकर रथबन्ध का सामना कर सके॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 8.53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  8.53.21 
रथबन्धमिमं घोरं पृथिव्यां नास्ति कश्चन।
य: सहेत पुमाँल्लोके मदन्यो यदुपुङ्गव॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे यदुवंशी श्रेष्ठ! इस पृथ्वी पर मेरे अतिरिक्त कोई दूसरा ऐसा नहीं है जो इस भयंकर रथबन्ध का सामना कर सके॥ 21॥
 
O great Yaduvanshi! There is no other person on this earth except me who can face this terrible Rathbandh (chariot's grip or chariot's enclosure)'॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)