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mahabharat 8.53.13-14h: माननीय महाराज! क्रोधित संशप्तकों ने चारों ओर से आक्रमण कर दिया और अर्जुन के रथ के घोड़े, दोनों पहिये तथा ईशादण्ड भी छीनने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  8.53.13-14h 
ते हयान् रथचक्रे च रथेषां चापि मारिष॥ १३॥
निग्रहीतुमुपाक्रामन् क्रोधाविष्टा: समन्तत:।
 
 
अनुवाद
माननीय महाराज! क्रोधित संशप्तकों ने चारों ओर से आक्रमण कर दिया और अर्जुन के रथ के घोड़े, दोनों पहिये तथा ईशादण्ड भी छीनने लगे।
 
Honorable King! The angry Samsaptaks attacked from all sides and started capturing the horses, two wheels of Arjuna's chariot and even the Isha-danda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)