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mahabharat 8.53.10-11h: हे मनुष्यों के स्वामी! आपकी सेना वहाँ स्थिर खड़ी हुई नाना प्रकार के पुष्पों से युक्त चैत्ररथ वन के समान शोभायमान हो रही थी।   |   mahabharat अध्याय 8.53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  8.53.10-11h 
तत: सा शुशुभे सेना निश्चेष्टावस्थिता नृप॥ १०॥
नानापुष्पसमाकीर्णं यथा चैत्ररथं वनम्।
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! आपकी सेना वहाँ स्थिर खड़ी हुई नाना प्रकार के पुष्पों से युक्त चैत्ररथ वन के समान शोभायमान हो रही थी।
 
O Lord of men! Your army, standing there motionless, began to look as beautiful as the Chaitrarath forest filled with various kinds of flowers. 10 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)