श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.53.1 
संजय उवाच
वर्तमाने तथा युद्धे क्षत्रियाणां निमज्जने।
गाण्डीवस्य महाघोष: श्रूयते युधि मारिष॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे आर्य! जब क्षत्रियों का नाश करने वाला वह भयंकर युद्ध चल रहा था, उसी समय दूसरी ओर से गाण्डीव धनुष की टंकार सुनाई दे रही थी॥1॥
 
Sanjaya says - O Arya! When that terrible war which destroyed the Kshatriyas was going on, at the same time the loud twang of the Gandiva bow could be heard from the other side.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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