श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 52: दोनों सेनाओंका घोर युद्ध और कौरव-सेनाका व्यथित होना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  8.52.32 
मांसशोणितपङ्किन्यो घोररूपा: सुदारुणा:।
नदी: प्रवर्तयामासु: शोणितौघविवर्धिनी:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उनके भीतर मांस और रक्त की कीचड़ जमा हो गई थी। योद्धाओं ने वहाँ रक्त की भयंकर और भयानक नदियाँ बहा दी थीं।
 
Mud of flesh and blood had accumulated inside them. The warriors had caused those fierce and dreadful rivers of blood to flow there. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)