श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 52: दोनों सेनाओंका घोर युद्ध और कौरव-सेनाका व्यथित होना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  8.52.25-26h 
तेषां छिन्ना महाराज भुजा: कनकभूषणा:।
उद्वेष्टन्ते विचेष्टन्ते पतन्ते चोत्पतन्ति च॥ २५॥
निपतन्ति तथैवान्ये स्फुरन्ति च सहस्रश:।
 
 
अनुवाद
महाराज! मनुष्यों की कटी हुई हजारों स्वर्ण-विभूषित भुजाएँ कभी टेढ़ी होकर किसी शरीर से चिपक जातीं, कभी छटपटातीं, गिरतीं, ऊपर उछलतीं, नीचे आतीं और पीड़ा से छटपटाने लगतीं॥25 1/2॥
 
Maharaj! Thousands of golden-adorned arms of human beings that were cut off would sometimes become crooked and cling to some body, sometimes writhe, fall, jump up, come down and start writhing in pain.॥ 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)