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mahabharat 8.52.23: आर्य! वहाँ भूमि पर पड़े हुए बहुत से घायल मनुष्य अपने स्वजनों को देखकर कराहने लगे। बहुत से अपने पितरों को देखकर दबी हुई वाणी में बोलने लगे॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 8.52: दोनों सेनाओंका घोर युद्ध और कौरव-सेनाका व्यथित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 52: दोनों सेनाओंका घोर युद्ध और कौरव-सेनाका व्यथित होना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  8.52.23 
नरास्तु निहता भूमौ कूजन्तस्तत्र मारिष।
दृष्ट्वा च बान्धवानन्ये पितॄनन्ये पितामहान्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
आर्य! वहाँ भूमि पर पड़े हुए बहुत से घायल मनुष्य अपने स्वजनों को देखकर कराहने लगे। बहुत से अपने पितरों को देखकर दबी हुई वाणी में बोलने लगे॥ 23॥
 
Arya! There many injured people lying on the ground started groaning on seeing their relatives. Many started speaking in a muffled voice on seeing their forefathers.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)