vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 52: दोनों सेनाओंका घोर युद्ध और कौरव-सेनाका व्यथित होना
»
श्लोक 2
श्लोक
8.52.2
रथौघाश्च हयौघाश्च नरौघाश्च समन्तत:।
गजौघाश्च महाराज संसक्ताश्च परस्परम्॥ २॥
अनुवाद
महाराज! रथ, घोड़े, हाथियों के झुंड और पैदल लोगों की भीड़, सभी एक-दूसरे में उलझे हुए थे।
King! The chariots, the horses, the herds of elephants and the crowds of men on foot were all entangled with each other.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×