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mahabharat 8.51.77-78h: किसी व्यक्ति में अपने माता-पिता, कर्म या चरित्र-स्वभाव के कारण जो भी विशेष गुण होता था, वह युद्धभूमि में उन्हें उसका वर्णन करता था।   |   mahabharat अध्याय 8.51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध  »  श्लोक 77-78h
 
 
श्लोक  8.51.77-78h 
यस्य यद्धि रणे व्यङ्गं पितृतो मातृतोऽपि वा॥ ७७॥
कर्मत: शीलतो वापि स तच्छ्रावयते युधि।
 
 
अनुवाद
किसी व्यक्ति में अपने माता-पिता, कर्म या चरित्र-स्वभाव के कारण जो भी विशेष गुण होता था, वह युद्धभूमि में उन्हें उसका वर्णन करता था।
 
Whatever special quality a person had on account of his parents, deeds or character-nature, he would narrate it to them on the battlefield. 77 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)