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mahabharat 8.51.76-77h: हे भरतवंश के राजा! उस समय भगवान श्रीकृष्ण का नाम लेते हुए गर्जना करते हुए योद्धाओं की नाना प्रकार की बातें निरन्तर सुनाई दे रही थीं।   |   mahabharat अध्याय 8.51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध  »  श्लोक 76-77h
 
 
श्लोक  8.51.76-77h 
शूराणां गर्जतां तत्र ह्यविच्छेदकृता गिर:॥ ७६॥
श्रूयन्ते विविधा राजन् नामान्युद्दिश्य भारत।
 
 
अनुवाद
हे भरतवंश के राजा! उस समय भगवान श्रीकृष्ण का नाम लेते हुए गर्जना करते हुए योद्धाओं की नाना प्रकार की बातें निरन्तर सुनाई दे रही थीं।
 
O King of the Bharat dynasty! At that time, the various types of talks of the roaring warriors could be heard in a continuous manner taking the name of Lord Krishna. 76 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)