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mahabharat 8.51.72-74h: जैसे जल का प्रवाह बड़े वेग से समुद्र में मिल जाता है, उसी प्रकार युद्धभूमि में एक सेना समूह अचानक दूसरे सेना समूह से जा मिला और आपस में टकराते हुए बाणों की भयंकर ध्वनि उत्पन्न होने लगी, ठीक वैसे ही जैसे गर्जते हुए समुद्र समूहों की गम्भीर ध्वनि उत्पन्न हो रही थी।   |   mahabharat अध्याय 8.51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध  »  श्लोक 72-74h
 
 
श्लोक  8.51.72-74h 
बलौघस्तु समासाद्य बलौघं सहसा रणे॥ ७२॥
उपासर्पत वेगेन वार्योघ इव सागरम्।
आसीन्निनाद: सुमहान् बाणौघानां परस्परम्॥ ७३॥
गर्जतां सागरौघाणां यथा स्यान्नि:स्वनो महान्।
 
 
अनुवाद
जैसे जल का प्रवाह बड़े वेग से समुद्र में मिल जाता है, उसी प्रकार युद्धभूमि में एक सेना समूह अचानक दूसरे सेना समूह से जा मिला और आपस में टकराते हुए बाणों की भयंकर ध्वनि उत्पन्न होने लगी, ठीक वैसे ही जैसे गर्जते हुए समुद्र समूहों की गम्भीर ध्वनि उत्पन्न हो रही थी।
 
Just as the flow of water merges with the ocean with great force, similarly on the battlefield one army group suddenly joined another army group and the loud sound of the arrows clashing with each other began to emerge just as the deep sound of the roaring ocean groups was emerging. 72-73 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)