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mahabharat 8.51.70-71h: उस महासमर में दोनों सेनाएँ आपस में उलझकर एक-दूसरे की ओर देखने लगीं और बड़े आनन्द तथा उत्साह के साथ लड़ने लगीं।   |   mahabharat अध्याय 8.51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध  »  श्लोक 70-71h
 
 
श्लोक  8.51.70-71h 
ते सेने भृशसंसक्ते दृष्ट्वान्योन्यं महाहवे॥ ७०॥
हर्षेण महता युक्ते परिगृह्य परस्परम्।
 
 
अनुवाद
उस महासमर में दोनों सेनाएँ आपस में उलझकर एक-दूसरे की ओर देखने लगीं और बड़े आनन्द तथा उत्साह के साथ लड़ने लगीं।
 
In that great battle the two armies, entangled with each other, looked at each other and began to fight with great joy and enthusiasm. 70 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)