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mahabharat 8.51.69-70h: हे प्रजानाथ! उनके आते ही वहाँ बड़ा कोलाहल मच गया, मानो वर्षा से उमड़ा हुआ समुद्र भयंकर गर्जना कर रहा हो।   |   mahabharat अध्याय 8.51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध  »  श्लोक 69-70h
 
 
श्लोक  8.51.69-70h 
तेषामापततां शब्दस्तीव्र आसीद् विशाम्पते॥ ६९॥
उद्‍वृत्तानां यथा वृष्ट्या सागराणां भयावह:।
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! उनके आते ही वहाँ बड़ा कोलाहल मच गया, मानो वर्षा से उमड़ा हुआ समुद्र भयंकर गर्जना कर रहा हो।
 
O Prajanath! At that time when he arrived there was a great uproar, as if the seas swollen by rain were roaring terribly. 69 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)