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नैव सूर्यप्रभा राजन् न दिश: प्रदिशस्तथा॥ ६६॥
प्राज्ञासिष्म वयं ते वा शरैर्मुक्तै: सहस्रश:।
अनुवाद
हे राजन! वहाँ छोड़े गए हजारों बाणों के कारण न तो सूर्य की किरणें दिखाई दे रही थीं, न दिशाएँ और न ही उपदिशाएँ। न तो हम पहचाने जा सकते थे और न ही हमारे शत्रु।
O King! Because of the thousands of arrows shot there, neither the rays of the Sun nor the directions or the sub-directions were visible. Neither we nor our enemies could be identified.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥