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mahabharat 8.51.66-67h: हे राजन! वहाँ छोड़े गए हजारों बाणों के कारण न तो सूर्य की किरणें दिखाई दे रही थीं, न दिशाएँ और न ही उपदिशाएँ। न तो हम पहचाने जा सकते थे और न ही हमारे शत्रु।   |   mahabharat अध्याय 8.51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध  »  श्लोक 66-67h
 
 
श्लोक  8.51.66-67h 
नैव सूर्यप्रभा राजन् न दिश: प्रदिशस्तथा॥ ६६॥
प्राज्ञासिष्म वयं ते वा शरैर्मुक्तै: सहस्रश:।
 
 
अनुवाद
हे राजन! वहाँ छोड़े गए हजारों बाणों के कारण न तो सूर्य की किरणें दिखाई दे रही थीं, न दिशाएँ और न ही उपदिशाएँ। न तो हम पहचाने जा सकते थे और न ही हमारे शत्रु।
 
O King! Because of the thousands of arrows shot there, neither the rays of the Sun nor the directions or the sub-directions were visible. Neither we nor our enemies could be identified.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)