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mahabharat 8.51.65-66h: महाराज! उन दोनों ने आकाश में बाणों का एक भयानक जाल फैलाया, जो सारस की पीठ के समान लाल और भयानक दिखाई दे रहा था।   |   mahabharat अध्याय 8.51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध  »  श्लोक 65-66h
 
 
श्लोक  8.51.65-66h 
ताभ्यां वियति राजेन्द्र विततं भीमदर्शनम्॥ ६५॥
क्रौञ्चपृष्ठारुणं रौद्रं बाणजालं व्यदृश्यत।
 
 
अनुवाद
महाराज! उन दोनों ने आकाश में बाणों का एक भयानक जाल फैलाया, जो सारस की पीठ के समान लाल और भयानक दिखाई दे रहा था।
 
King! Both of them spread a fearsome net of arrows in the sky, which looked red and terrifying like the back of a crane. 65 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)