Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.51.64-65h: सात्यकि के बाणों से अत्यन्त घायल होने पर भी कर्ण भीमसेन का सामना करने के लिए अडिग रहा। वे दोनों ही श्रेष्ठ धनुर्धर, महाबुद्धिमान वीर थे और जब वे एक-दूसरे से टकराकर चमकते हुए बाणों की वर्षा करते थे, तब अत्यन्त शोभा पाते थे। | mahabharat अध्याय 8.51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सात्यकि के बाणों से अत्यन्त घायल होने पर भी कर्ण भीमसेन का सामना करने के लिए अडिग रहा। वे दोनों ही श्रेष्ठ धनुर्धर, महाबुद्धिमान वीर थे और जब वे एक-दूसरे से टकराकर चमकते हुए बाणों की वर्षा करते थे, तब अत्यन्त शोभा पाते थे।
Karna, despite being greatly hurt by Satyaki's arrows, stood firm to face Bhimasena. Both of them were the best archers and were brave men of great mind and looked very beautiful when they clashed with each other and showered shining arrows. 64 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥