श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  8.51.60 
तत: स प्रद्रुतं संख्ये रथं दृष्ट्वा महारथ:।
अन्वधावत् किरन् बाणै: कङ्कपत्रैरजिह्मगै:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर महारथी कर्ण ने युधिष्ठिर के रथ को रणभूमि में सारथि के बिना ही घूमते हुए देखा और कंक-पत्र लगे हुए बाणों की वर्षा करते हुए उसके पीछे दौड़ना आरम्भ कर दिया।
 
Then the mighty car-warrior Karna, seeing Yudhishthira's chariot moving about in the battlefield without a charioteer, began to run after it, showering straight-going arrows with arrows tipped with 'kanka-patra'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)