श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  8.51.43 
विरथो भरतश्रेष्ठ प्रहसन्ननिलोपम:।
गदां गृह्य महाबाहुरपतत् स्यन्दनोत्तमात्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! रथहीन होने पर भी वायु के समान प्रबल महाबाहु भीमसेन हाथ में गदा लेकर हँसते हुए उस उत्तम रथ से कूद पड़े।
 
O best of the Bharatas! Being without a chariot, the mighty-armed Bhimasena, as strong as the wind, laughingly jumped from that excellent chariot, taking his mace in his hand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)