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mahabharat 8.51.41-42: राजन! फिर भाले से अपने सारथि को यमलोक भेज दिया और तुरन्त ही बाण से उसका धनुष काटकर, बिना अधिक पीड़ा के, क्षण भर में ही, मानो मुस्कराते हुए, भयंकर पराक्रमी भीमसेन को रथहीन कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध  »  श्लोक 41-42
 
 
श्लोक  8.51.41-42 
सारथिं चास्य भल्लेन प्रेषयामास मृत्यवे।
छित्त्वा च कार्मुकं तूर्णं पाण्डवस्याशु पत्रिणा॥ ४१॥
ततो मुहूर्ताद् राजेन्द्र नातिकृच्छ्राद्धसन्निव।
विरथं भीमकर्माणं भीमं कर्णश्चकार ह॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
राजन! फिर भाले से अपने सारथि को यमलोक भेज दिया और तुरन्त ही बाण से उसका धनुष काटकर, बिना अधिक पीड़ा के, क्षण भर में ही, मानो मुस्कराते हुए, भयंकर पराक्रमी भीमसेन को रथहीन कर दिया।
 
King! Then with a spear his charioteer was sent to Yamaloka and immediately by cutting off his bow with an arrow, without much pain and in a moment, smiling as if smiling, Karna rendered the fearsome and mighty Bhimasena chariotless.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)