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mahabharat 8.51.32-33h: जब कर्ण ने बिजली और वज्र के समान गर्जना करने वाले उस परिघ को अपनी ओर आते देखा, तब उसने विषैले सर्पों के समान भयंकर बाणों से उसके अनेक टुकड़े कर डाले।   |   mahabharat अध्याय 8.51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  8.51.32-33h 
तमापतन्तं परिघं वज्राशनिसमस्वनम्॥ ३२॥
चिच्छेद बहुधा कर्ण: शरैराशीविषोपमै:।
 
 
अनुवाद
जब कर्ण ने बिजली और वज्र के समान गर्जना करने वाले उस परिघ को अपनी ओर आते देखा, तब उसने विषैले सर्पों के समान भयंकर बाणों से उसके अनेक टुकड़े कर डाले।
 
When Karna saw that Parigha, who was making thunder like lightning and thunderbolt, coming towards him, he cut it into many pieces with his fierce arrows, which looked like poisonous serpents. 32 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)