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mahabharat 8.51.29-30: तब कर्ण ने अत्यन्त क्रोधित होकर एक शक्तिशाली धनुष हाथ में लिया, उसे तीक्ष्ण किया और कंकपत्रयुक्त दस बाणों से भीमसेन को घायल कर दिया। साथ ही एक तीक्ष्ण भाले से उसका धनुष भी काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 8.51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध  »  श्लोक 29-30
 
 
श्लोक  8.51.29-30 
तत: कर्णो भृशं क्रुद्धो दृढमादाय कार्मुकम्॥ २९॥
भीमं विव्याध दशभि: कङ्कपत्रै: शिलाशितै:।
कार्मुकं चास्य चिच्छेद भल्लेन निशितेन च॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तब कर्ण ने अत्यन्त क्रोधित होकर एक शक्तिशाली धनुष हाथ में लिया, उसे तीक्ष्ण किया और कंकपत्रयुक्त दस बाणों से भीमसेन को घायल कर दिया। साथ ही एक तीक्ष्ण भाले से उसका धनुष भी काट डाला।
 
Then Karna, being very angry, took a strong bow in his hand, sharpened it and wounded Bhimasena with ten arrows having leaves of Kankpatra. Along with that he also cut off his bow with a sharp spear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)