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mahabharat 8.51.25-26h: तब श्रेष्ठ अस्त्र-शस्त्र चलाने में निपुण कर्ण ने अत्यन्त क्रोधित होकर लोहे के बने हुए, मुड़े हुए सिरों वाले नौ बाणों से भीमसेन को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छ: पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  8.51.25-26h 
तत: कर्णो भृशं क्रुद्धो भीमं नवभिरायसै:॥ २५॥
विव्याध परमास्त्रज्ञो भल्लै: संनतपर्वभि:।
 
 
अनुवाद
तब श्रेष्ठ अस्त्र-शस्त्र चलाने में निपुण कर्ण ने अत्यन्त क्रोधित होकर लोहे के बने हुए, मुड़े हुए सिरों वाले नौ बाणों से भीमसेन को घायल कर दिया।
 
Then Karna, who was adept at the best of weapons, became very angry and wounded Bhimasena with nine arrows made of iron having bent ends.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)