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mahabharat 8.50.d4: भीमसेन बोले - हे राजन! मैं अर्जुन के दृढ़ निश्चय को जानता हूँ; किन्तु इस पापी कर्ण ने मेरे सामने राजा युधिष्ठिर का अपमान किया है, इसलिए क्रोध में भरकर मैंने अन्य किसी बात की चिंता नहीं की।   |   mahabharat अध्याय 8.50: कर्ण और भीमसेनका युद्ध तथा कर्णका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.50.d4 
भीम उवाच
दृढव्रतत्वं पार्थस्य जानामि नृपसत्तम।
राज्ञस्तु धर्षणं पाप: कृतवान् मम संनिधौ॥
तत: कोपाभिभूतेन शेषं न गणितं मया।
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले - हे राजन! मैं अर्जुन के दृढ़ निश्चय को जानता हूँ; किन्तु इस पापी कर्ण ने मेरे सामने राजा युधिष्ठिर का अपमान किया है, इसलिए क्रोध में भरकर मैंने अन्य किसी बात की चिंता नहीं की।
 
Bhimsena said - O great king! I know Arjun's firm resolve; but this sinner Karna has insulted King Yudhishthira in my presence, therefore, being overcome by anger, I have not cared about anything else.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)