श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 50: कर्ण और भीमसेनका युद्ध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक d12-d13
 
 
श्लोक  8.50.d12-d13 
युधिष्ठिरस्य कोपेन पूर्वं दग्धो नृशंसकृत्॥
त्वया संरक्षितस्त्वस्य मत्समीपादुपायत:॥ )
 
 
अनुवाद
यह क्रूर कर्ण तो महाराज युधिष्ठिर के क्रोध से पहले ही जल चुका था। आज तुमने उचित उपाय करके इसे मेरे सान्निध्य से बचा लिया है।
 
This cruel Karna was already burnt by the anger of Maharaj Yudhishthira. Today you have saved him from my proximity by using the appropriate method.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)