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mahabharat 8.50.8-9h: उन्होंने वीर सात्यकि और द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न से कहा, "आप सब लोग धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर की रक्षा करें। वे अभी-अभी मेरे सामने अपने प्राणों पर आए महान संकट से बचकर आये हैं।"   |   mahabharat अध्याय 8.50: कर्ण और भीमसेनका युद्ध तथा कर्णका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 50: कर्ण और भीमसेनका युद्ध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  8.50.8-9h 
सोऽब्रवीत् सात्यकिं वीरं धृष्टद्युम्नं च पार्षतम्।
यूयं रक्षत राजानं धर्मात्मानं युधिष्ठिरम्॥ ८॥
संशयान्महतो मुक्तं कथंचित् प्रेक्षतो मम।
 
 
अनुवाद
उन्होंने वीर सात्यकि और द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न से कहा, "आप सब लोग धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर की रक्षा करें। वे अभी-अभी मेरे सामने अपने प्राणों पर आए महान संकट से बचकर आये हैं।"
 
He said to the brave Satyaki and Dhrishtadyumna, the son of Drupada, "You all should protect the righteous king Yudhishthira. He has just now been saved from a great danger to his life in front of me. 8 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)