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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 50: कर्ण और भीमसेनका युद्ध तथा कर्णका पलायन
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श्लोक 17
श्लोक
8.50.17
त्रैलोक्यस्य समस्तस्य शक्त: क्रुद्धो निवारणे।
बिभर्ति सदृशं रूपं युगान्ताग्निसमप्रभम्॥ १७॥
अनुवाद
इस समय वे अपने क्रोध से सम्पूर्ण तीनों लोकों को रोकने में समर्थ हैं, क्योंकि उन्होंने प्रलयकाल की अग्नि के समान तेजस्वी रूप धारण कर लिया है ॥17॥
At this time, He is capable of stopping the entire three worlds in His wrath, because He has assumed a radiant form like the fire of doomsday. ॥17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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