श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 50: कर्ण और भीमसेनका युद्ध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  8.50.10-11 
अन्तमद्य गमिष्यामि तस्य दु:खस्य पार्षत॥ १०॥
हन्तास्म्यद्य रणे कर्णं स वा मां निहनिष्यति।
संग्रामेण सुघोरेण सत्यमेतद् ब्रवीमि ते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
द्रुपदकुमार! इससे मुझे बड़ा दुःख हुआ है; इसलिए अब मैं इसका बदला लूँगा। आज रणभूमि में अत्यन्त भयंकर युद्ध में या तो मैं कर्ण को मारूँगा या वह मुझे मारेगा; यह मैं तुमसे सत्य कहता हूँ॥ 10-11॥
 
Drupadakumar! This has caused me great sorrow; therefore, now I will take revenge. Today in a very fierce battle on the battlefield, either I will kill Karna or he will kill me; I am telling you this truth.॥ 10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)