श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 50: कर्ण और भीमसेनका युद्ध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  8.50.1-2 
संजय उवाच
तानभिद्रवतो दृष्ट्वा पाण्डवांस्तावकं बलम्।
दुर्योधनो महाराज वारयामास सर्वश:॥ १॥
योधांश्च स्वबलं चैव समन्ताद् भरतर्षभ।
क्रोशतस्तव पुत्रस्य न स्म राजन् न्यवर्तत॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं— महाराज! पाण्डवों को आपकी सेना पर आक्रमण करते देख दुर्योधन ने उन योद्धाओं को रोकने तथा अपनी सेना को स्थिर करने के लिए सब ओर से प्रयत्न किया। हे भरतश्रेष्ठ! हे राजन! आपके पुत्र के जोर से चिल्लाने पर भी भागती हुई सेना पीछे नहीं लौटी।
 
Sanjaya says— Maharaj! Seeing the Pandavas attacking your army, Duryodhan made every effort from all sides to stop those warriors and also to stabilize his army. O best of the Bharatas! O king! Even after your son's loud screaming, the fleeing army did not turn back. 1-2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)