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हे राजन! आपने राज्य चाहने वाले अपने पुत्रों का हित चाहकर भी पाण्डवों का सदैव अनिष्ट ही किया; यह आपके कर्मों का फल है ॥59-60॥
O King! While you desired the welfare of your sons who desired the kingdom, you always did harm to the Pandavas; this is the result of your deeds. ॥ 59-60॥
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि संजयवाक्ये पञ्चमोऽध्याय:॥ ५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें संजय-वाक्यविषयक पाँचवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥