श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 5: संजयका धृतराष्ट्रको कौरवपक्षके मारे गये प्रमुख वीरोंका परिचय देना  »  श्लोक 59-60
 
 
श्लोक  8.5.59-60 
पुत्राणां राज्यकामानां त्वया राजन् हितैषिणा॥ ५९॥
अहितान्येव चीर्णानि तेषां तत् फलमागतम्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! आपने राज्य चाहने वाले अपने पुत्रों का हित चाहकर भी पाण्डवों का सदैव अनिष्ट ही किया; यह आपके कर्मों का फल है ॥59-60॥
 
O King! While you desired the welfare of your sons who desired the kingdom, you always did harm to the Pandavas; this is the result of your deeds. ॥ 59-60॥
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि संजयवाक्ये पञ्चमोऽध्याय:॥ ५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें संजय-वाक्यविषयक पाँचवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)