श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 5: संजयका धृतराष्ट्रको कौरवपक्षके मारे गये प्रमुख वीरोंका परिचय देना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  8.5.25 
नित्यं प्रसक्तवैरो य: पाण्डवै: पृथिवीपति:।
विश्राव्य वैरं पार्थेन श्रुतायु: स निपातित:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों के साथ सदैव शत्रुता रखने वाले राजा श्रुतायुको को कुन्तीकुमार अर्जुन ने उसकी शत्रुता का स्मरण कराकर मार डाला ॥25॥
 
King Shrutayuko, who always had enmity with the Pandavas, was killed by Kuntikumar Arjun after reminding him of his enmity. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)