श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 5: संजयका धृतराष्ट्रको कौरवपक्षके मारे गये प्रमुख वीरोंका परिचय देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  8.5.14 
तथा दौ:शासनि: शूरो बाहुशाली रणोत्कट:।
द्रौपदेयेन सङ्गम्य गमितो यमसादनम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
युद्धोन्मादी शूरवीर दुःशासन अपने बाहुबल से सुशोभित होकर द्रौपदीपुत्र से युद्ध करके यमलोक में पहुँचा।14.
 
The battle-crazy valiant Dushasan, adorned with his arm strength, after fighting with Draupadi's son, reached Yamaloka. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)