Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.49.d9-d10h: उस समय, पुरुषोत्तम युधिष्ठिर युद्धभूमि में उगते हुए सूर्य के समान लाल दिखाई दे रहे थे। उनके शरीर के सभी अंगों में बाण लगे हुए थे और कवच टुकड़े-टुकड़े हो गए थे, फिर भी वे क्षत्रिय धर्म का आश्रय लेकर सिंह के समान गर्जना कर रहे थे। | mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(बभासे पुरुषश्रेष्ठ उद्यन्निव दिवाकर:।
स शराचितसर्वाङ्गश्छिन्नवर्माथ संयुगे॥
क्षत्रधर्मं समास्थाय सिंहनादमकुर्वत।)
अनुवाद
उस समय, पुरुषोत्तम युधिष्ठिर युद्धभूमि में उगते हुए सूर्य के समान लाल दिखाई दे रहे थे। उनके शरीर के सभी अंगों में बाण लगे हुए थे और कवच टुकड़े-टुकड़े हो गए थे, फिर भी वे क्षत्रिय धर्म का आश्रय लेकर सिंह के समान गर्जना कर रहे थे।
At that time, the best of men, Yudhishthira, appeared red like the rising sun on the battlefield. Arrows were stuck in all his body parts and his armor was torn to pieces, yet he was roaring like a lion there, taking refuge in the Kshatriya Dharma.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥