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mahabharat 8.49.d3: उसके नाम से अंकित स्वर्ण पंख वाले तीखे बाण चारों ओर से पृथ्वी पर गिरने लगे, जो मनुष्यों और घोड़ों के शरीरों को छेदते हुए निकल रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  8.49.d3 
कर्णनामाङ्किता बाणा: स्वर्णपुङ्खा: सुतेजना:।
नराश्वकायान् निर्भिद्य पेतुरुर्व्यां समन्तत:॥
 
 
अनुवाद
उसके नाम से अंकित स्वर्ण पंख वाले तीखे बाण चारों ओर से पृथ्वी पर गिरने लगे, जो मनुष्यों और घोड़ों के शरीरों को छेदते हुए निकल रहे थे।
 
Sharp arrows with golden feathers inscribed with his name began falling on the earth from all sides, piercing the bodies of men and horses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)