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mahabharat 8.49.d17: जिस रथ के घोड़े और सारथी मारे गए थे, उसी रथ पर खड़े होकर शनि के महारथी सत्य ने कर्ण पर वैदूर्य मणि से विभूषित शक्ति का प्रयोग किया।   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक d17
 
 
श्लोक  8.49.d17 
हताश्वसूते तु रथे स्थित: स शिनिपुङ्गव:।
शक्तिं चिक्षेप कर्णाय वैडूर्यमणिभूषिताम्॥
 
 
अनुवाद
जिस रथ के घोड़े और सारथी मारे गए थे, उसी रथ पर खड़े होकर शनि के महारथी सत्य ने कर्ण पर वैदूर्य मणि से विभूषित शक्ति का प्रयोग किया।
 
Satya, the great warrior of Saturn, standing on the same chariot whose horses and charioteer were killed, used the power adorned with the Vaidurya gem on Karna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)