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श्लोक 8.49.d16  |
अपरेणाथ भल्लेन धनुश्छित्त्वा महारथ:।
सारथे: सशिरस्त्राणं शिर: कायादपाहरत्॥ |
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| अनुवाद |
| तब दूसरे महारथी कर्ण ने उसका धनुष काट डाला और अपने सारथि का सिर तथा मुकुट उसके शरीर से अलग कर दिया। |
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| Then the other great charioteer Karna cut off his bow and severed his charioteer's head along with his helmet from his body. |
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