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mahabharat 8.49.d15: तत्पश्चात् सूतपुत्र ने चार तीखे बाणों से सात्यकि के चारों घोड़ों को तुरन्त यमलोक भेज दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक d15
 
 
श्लोक  8.49.d15 
अथास्य चतुरो वाहांश्चतुर्भिर्निशितै: शरै:।
सूतपुत्रोऽनयत् क्षिप्रं यमस्य सदनं प्रति॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सूतपुत्र ने चार तीखे बाणों से सात्यकि के चारों घोड़ों को तुरन्त यमलोक भेज दिया।
 
Thereafter, with four sharp arrows, Suta's son immediately sent Satyaki's four horses to Yamaloka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)