vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन
»
श्लोक d14
श्लोक
8.49.d14
दक्षिणं तु भुजं तस्य त्रिभि: कर्णोऽप्यविध्यत।
सव्यं षोडशभिर्बाणैर्यन्तारं चास्य सप्तभि:॥
अनुवाद
इसके बाद कर्ण ने तीन बाणों से सात्यकि की दाहिनी भुजा, सोलह बाणों से बायीं भुजा तथा सात बाणों से सारथि को घायल कर दिया।
After this, Karna injured Satyaki's right arm with three arrows, his left arm with sixteen arrows and the charioteer with seven arrows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×