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mahabharat 8.49.d1: तत्पश्चात् अमोघ आत्मबल से संपन्न वैकर्तन कर्ण ने पुनः चेदिदेश के दस प्रमुख वीरों का वध कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  8.49.d1 
(तत: पुनरमेयात्मा चेदीनां प्रवरान् दश।
न्यहनद् भरतश्रेष्ठ कर्णो वैकर्तनस्तदा॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् अमोघ आत्मबल से संपन्न वैकर्तन कर्ण ने पुनः चेदिदेश के दस प्रमुख वीरों का वध कर दिया।
 
Bharatshrestha! Thereafter, Vaikartan Karna, endowed with immeasurable self-power, again killed the ten chief heroes of Chedidesh.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)