श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 88-89h
 
 
श्लोक  8.49.88-89h 
लोहितस्य तु गन्धेन स्पर्शेन च रसेन च।
रूपेण चातिरक्तेन शब्देन च विसर्पता॥ ८८॥
विषाद: सुमहानासीत् प्राय: सैन्यस्य भारत।
 
 
अनुवाद
हे भारत! चारों ओर फैले हुए रक्त की गंध, स्पर्श, स्वाद, दृश्य और ध्वनि से लगभग समस्त सेना के मन में महान दुःख उत्पन्न हो रहा था।
 
Bharat! The smell, touch, taste, sight and even sound of the blood that was spreading everywhere was causing great sadness in the minds of almost the entire army. 88 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)