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mahabharat 8.49.77-78h: यह महान आश्चर्य देखकर हर्ष और उत्साह से भरे हुए, स्वर्ग की इच्छा रखने वाले योद्धा शीघ्रतापूर्वक एक दूसरे को मारने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 77-78h
 
 
श्लोक  8.49.77-78h 
तद् दृष्ट्वा महदाश्चर्यं प्रत्यक्षं स्वर्गलिप्सया॥ ७७॥
प्रहृष्टमनस: शूरा: क्षिप्रं जघ्नु: परस्परम्।
 
 
अनुवाद
यह महान आश्चर्य देखकर हर्ष और उत्साह से भरे हुए, स्वर्ग की इच्छा रखने वाले योद्धा शीघ्रतापूर्वक एक दूसरे को मारने लगे।
 
Seeing this great wonder, the warriors filled with joy and enthusiasm, eager for heaven, began to kill one another rapidly. 77 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)