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mahabharat 8.49.76-77h: अप्सराएं लाखों योद्धाओं को, जो आमने-सामने की लड़ाई में योद्धाओं द्वारा मारे जाते थे, अपने विमानों द्वारा स्वर्ग ले जाती थीं।   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 76-77h
 
 
श्लोक  8.49.76-77h 
हतानभिमुखान् वीरान् वीरै: शतसहस्रश:॥ ७६॥
आरोप्यारोप्य गच्छन्ति विमानेष्वप्सरोगणा:।
 
 
अनुवाद
अप्सराएं लाखों योद्धाओं को, जो आमने-सामने की लड़ाई में योद्धाओं द्वारा मारे जाते थे, अपने विमानों द्वारा स्वर्ग ले जाती थीं।
 
The Apsaras used to take millions of warriors, who were killed by the warriors in face-to-face fighting, to heaven in their aeroplanes. 76 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)