श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 67-68h
 
 
श्लोक  8.49.67-68h 
अभवत् तुमुल: शब्दो योधानां तत्र भारत॥ ६७॥
रथहस्त्यश्वपत्तीनां शस्त्राणां च ततस्तत:।
 
 
अनुवाद
भरत! तब सर्वत्र रथियों, हाथियों, घुड़सवारों, पैदलों और अस्त्र-शस्त्रों की भयंकर ध्वनि गूँजने लगी।
 
Bharata! Then everywhere the dreadful sounds of charioteers, elephant riders, horsemen, foot soldiers and weapons started resounding. 67 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)