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mahabharat 8.49.65-66h: अपनी सेना को पराजित होते देख धर्मराज युधिष्ठिर क्रोधित हो उठे और अपने सैनिकों से बोले, "अरे! तुम लोग चुप क्यों बैठे हो? इन शत्रुओं का संहार करो।"   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 65-66h
 
 
श्लोक  8.49.65-66h 
काल्यमानं बलं दृष्ट्वा धर्मराजो युधिष्ठिर:॥ ६५॥
स्वान् योधानब्रवीत् क्रुद्धो निघ्नतैतान् किमासत।
 
 
अनुवाद
अपनी सेना को पराजित होते देख धर्मराज युधिष्ठिर क्रोधित हो उठे और अपने सैनिकों से बोले, "अरे! तुम लोग चुप क्यों बैठे हो? इन शत्रुओं का संहार करो।"
 
Seeing his army being routed, Dharmaraja Yudhishthira became angry and said to his soldiers, "Hey! Why are you sitting silent? Kill these enemies."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)