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mahabharat 8.49.63-64h: उस समय तुरही, शंख, नगाड़े और धनुष की ध्वनि सर्वत्र फैल रही थी और दुर्योधन के सैनिक सिंह के समान दहाड़ रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 63-64h
 
 
श्लोक  8.49.63-64h 
भेरीशङ्खमृदङ्गानां कार्मुकाणां च नि:स्वन:॥ ६३॥
बभूव धार्तराष्ट्राणां सिंहनादरवस्तथा।
 
 
अनुवाद
उस समय तुरही, शंख, नगाड़े और धनुष की ध्वनि सर्वत्र फैल रही थी और दुर्योधन के सैनिक सिंह के समान दहाड़ रहे थे।
 
At that time the sound of trumpets, conches, drums and bows was spreading everywhere and Duryodhana's soldiers were roaring like lions. 63 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)