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mahabharat 8.49.59-60h: युधिष्ठिर से ऐसा कहकर महाबली कर्ण ने उसे छोड़ दिया और पाण्डव सेना का उसी प्रकार संहार करने लगा, जैसे वज्रधारी इन्द्र राक्षसों की सेना का संहार करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 59-60h
 
 
श्लोक  8.49.59-60h 
एवमुक्त्वा तत: पार्थं विसृज्य च महाबल:॥ ५९॥
न्यहनत् पाण्डवीं सेनां वज्रहस्त इवासुरीम्।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर से ऐसा कहकर महाबली कर्ण ने उसे छोड़ दिया और पाण्डव सेना का उसी प्रकार संहार करने लगा, जैसे वज्रधारी इन्द्र राक्षसों की सेना का संहार करते हैं।
 
Having said this to Yudhishthira, the mighty Karna then released him and began destroying the Pandava army in the same manner as Indra, the bearer of the thunderbolt, destroys the army of demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)