Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.49.57: माननीय महाराज! इन वीरों से कभी भी अप्रिय वचन न बोलें और न ही इस महायुद्ध में कदम रखें। यदि अप्रिय वचन बोलना ही है, तो दूसरों से बोलें, मुझ जैसे वीरों से नहीं। | mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मा चैतानप्रियं ब्रूहि मा वै व्रज महारणम्।
वक्तव्या मारिषान्ये तु न वक्तव्यास्तु मादृशा:॥ ५७॥
अनुवाद
माननीय महाराज! इन वीरों से कभी भी अप्रिय वचन न बोलें और न ही इस महायुद्ध में कदम रखें। यदि अप्रिय वचन बोलना ही है, तो दूसरों से बोलें, मुझ जैसे वीरों से नहीं।
Honorable King! Do not ever speak unpleasant words to these brave men nor set foot in this great war. If you have to speak unpleasant words, then speak to others; not to brave men like me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥