मा चैतानप्रियं ब्रूहि मा वै व्रज महारणम्।
वक्तव्या मारिषान्ये तु न वक्तव्यास्तु मादृशा:॥ ५७॥
अनुवाद
माननीय महाराज! इन वीरों से कभी भी अप्रिय वचन न बोलें और न ही इस महायुद्ध में कदम रखें। यदि अप्रिय वचन बोलना ही है, तो दूसरों से बोलें, मुझ जैसे वीरों से नहीं।
Honorable King! Do not ever speak unpleasant words to these brave men nor set foot in this great war. If you have to speak unpleasant words, then speak to others; not to brave men like me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥