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mahabharat 8.49.5: किन्तु कर्ण के बाणों से घायल होकर वे सभी कटे हुए वृक्षों की भाँति पृथ्वी पर गिर पड़े और उनके हाथ, सिर और कवच नष्ट हो गए।   |   mahabharat अध्याय 8.49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  8.49.5 
ते विबाहुशिरस्त्राणा: प्रहता: कर्णसायकै:।
पेतु: पृथिव्यां युगपच्छिन्नं शालवनं यथा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
किन्तु कर्ण के बाणों से घायल होकर वे सभी कटे हुए वृक्षों की भाँति पृथ्वी पर गिर पड़े और उनके हाथ, सिर और कवच नष्ट हो गए।
 
But being wounded by Karna's arrows, they all fell down on the earth like cut trees, losing their arms, head and armour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)